नानक खेती..

सम्बन्ध - मन तन परिवार समाज प्रकृति से

मानव सभ्यता इस वक्त एक बहुत नाज़ुक समय से गुजर रही है। बहुत से लोग अपनी जीवन शैली और सामाजिक व्यवस्था से असंतुष्ट या बीमार होकर इसको समझने और विकल्पों की खोज में लग गए हैं। पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था के स्तर पर नए प्रयोग हो रहें हैं, विकल्प ढूंढे और सुझाए जा रहें हैं।

हमलोग भी इस ज़रूरत को समझते हुए, जीवन में एक नए पथ पर चल पड़ें हैं, एक नए समीकरण की खोज में जो हमारी मानवता, सामाजिकता और आध्यात्मिकता को निखारने में मददगार हो, हमको संतुष्टि प्रदान करे और मानवीयता के सुदृढ़करण के कार्य में हमारा भी कुछ योगदान संभव हो सके।

आज समय के अनुकूल बदलाव लाने के लिए हम गुरु नानक साहिब की शिक्षा, उनके कार्य और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम जिस समीकरण को जोड़ने - बनाने की कोशिश में लग गए हैं इसको हमने "नानक खेती" का नाम दिया है।

यहां हम उन शिक्षाओं और तकनीक (ज्योति और जुगत) को जोड़ने और परिपूर्ण करने का कार्य करेंगे जो हमे स्वस्थ्य, संतुष्ट, विस्तार, सामाजिक सेवा और उद्देश्यपूर्ण जीवन की तरफ अग्रसर करे।

नानक खेती एक संकल्प है, एक अनुबंध है - मानवीय संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक व्यवस्था के सुदृढ़करण के लिए।

मानव जाति वैश्वीकरण के दौर से गुजरते हुए एक नई तरह की संस्कृति, सभ्यता, शिक्षा और न्याय व्यवस्था की ओर अग्रसारित होती दिख रही है।

इसी मार्ग में शामिल होकर हम लोग भी अपने जीवन को सुघड़ बनाने हेतु नानक खेती द्वारा विभिन्न कार्यों को करने का बीड़ा उठा लिए हैं।

लोग बाजारी व्यवस्था के प्रभाव से फैले भौतिकवाद की अत्याधिक संकीर्ण / संकुचित सोच और राजनैतिक परिवेश में फस जिन मुश्किलों का सामना करते है उससे न सिर्फ उनका स्वास्थ बिगड़ता है अपितु पूरी जीवन-शैली और भविष्य पर बुरा असर होता है। इन सारी फसावटों से बाहर निकल कर एक जिम्मेदार स्वच्छंद जीवन रचना कर उसको सफलता, संतुष्टि और सुख पूर्वक जीने की हमारी कोशिश है।

हमारी कोशिश है उन सब लोगों को भी इस परियोजना में शामिल करने की जो किसी ऐसी ही खोज या कोशिशों में लगे हुए हैं, या जो मानते है की उनका और आने वाली पीढ़ियों का इस पथ पर चलकर कुछ भला हो सकता है।

नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत्त का भला